एक छोटा सा गाँव जिसका नाम विशनपुरा था वहा एक हरी नाम का साहूकार रहता था उसकी एक ही संतान थी जिसका नाम सुरभि था
वो गाँववालो को क़ृषि, कारोबार इत्यादि करने के लिए क़र्ज़ दिया करता था |
कुछ दिनों के बाद जैक नाम का युवा हरी सिँह के पास क़र्ज़ लेने को आया हरी सिंह ने उससे कहा की तुम तो इस गाँव के नहीं लगते तब जैक ने बताया की वो शहर से गाँव मे अपना बिज़नेस करने के लिए रूपए ले कर निकला था लेकिन बिच रास्ते मे ही उससे कुछ डाकुओ ने लूट लिया अब फूटी कौड़ी नी बचा
हरी सिंह कुछ सोचा और उसने ये कहकर मना कर दिया की वो इस गाँव मे नया है कोई जानता भी नहीं अगर क़र्ज़ चुकाने से पहले भाग गए तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
जैक उदास हो कर लौट जाता है और वो एक पेड़ के निचे ही रात मे रुकने का निर्णय लेता है और सोचता है शहर से आते वक़्त क्या कुछ नहीं सोचा था और क्या हो गया और सोचते सोचते सो जाता है
रात मे अचानक उसकी आँख एक खुसफुसाने की आवाज़ से खुल जाता है थोड़ी दूर धीरे धीरे बिना आवाज़ चलने के बाद वो एक पेड़ के पीछे से देखता है तो उसे वही डाकू दीखते है जिन्होंने उससे रास्ते मे पैसे लूट लिए थे वो सब एक ख़ुफ़िया मकान मे कुछ छिपा रहे थे शायद लूट का सामान होगा
वो कुछ देर बाद वहा से चले जाते है जैक फिर उस मकान मे अपने सामान देखने जाता है जब वो अंदर जाता है तो देखता है की ये मकान सिर्फ बाहर से ही अजीव दीखता है अंदर से तो काफ़ी शानदार है यहाँ बहुत से लूट के सामान था जैक अपने पैसे और सामान लेकर चला जाता है |
वो फिर अपना व्यापार शुरू करता है और वो ठीक ठाक चल रहा था|
एक सुबह साहूकार सबको किसी भोज का निमंत्रण देने आता है और जैक को भी निमंत्रण देता है जैक जाने वाला तो नहीं था मगर उसने जब साहूकार की बेटी को देखा तो अपना मन बदल लिया उसकी बेटी जिसका अभी जैक को नाम नहीं पता था उसे एक नजर मे प्रेम कर लेता है
एक सुबह जब साहूकार की बेटी मंदिर मे पूजा करने के लिए जा रही थी तब जैक भी पीछे पीछे गया जब वो मंदिर से घर की और जा रही थी तब उसने बड़ी हिम्मत जुटा कर उसे
अपनी दिल की बात कही
साहूकार की बेटी ने पहले भारी आवाज़ मे बोली की तुम मुझे जानते भी हो कौन हु? क्या नाम है मेरा??
जैक चुप हो कर सुनता रहा
फिर उसने बताया की सुरभि नाम है मेरा
तब जैक ने बोला मे जैक हु |
सुरभि बोली मे भी तुम्हे पसंद करती हु ! पर पिताजी नहीं मनेंगे
जैक भी सोचा की जो इंसान क़र्ज़ नी देसकता वो अपनी इकलौती बेटी क्या देगा !
फिर उसने सुरभि से कहा तुम घर जाओ मे कुछ सोचता हु!
जैक का बिज़नेस मे बहुत बड़ा घाटा हो गया एक और मुसीबत आगया उसपे फिर वो सोचता है आगे क्या करेगा अब तभी उसे उन डाकुओ के ख़ुफ़िया मकान याद आया उसने रात मे वहा से कुछ पैसे लाने का सोचा रात हुआ चुप चाप वहा पंहुचा तब कुछ ऐसा देखा जिससे उससे बहुत सुकून मिला उसने देखा की साहूकार उन डाकुओ से बाते कर रहा था की कितना लूटा इस महीने और फिर सबको कुछ हिस्सा दिया बाकी वो रख लिया n
इसका मतलब यह था की वो साहूकार ही बाहर से आने वालो को लूटवाता है और फिर इन पैसों को क़र्ज़ पर देता था
अब जैक ने एक प्लान बनाया उसने रात मे सबके जाने के बाद वहा से लूट के सामान मे से कुछ रख ले कर आगया
अगली सुबह वो पुलिस के पास ये सब बताया मगर साहूकार का नाम नहीं बताया रात मे पुलिस ने सभी लूटेरो को हथकड़ी पहना दिया
इस खबर से साहूकार बहुत डरा हुआ था
जैक अगली सुबह साहूकार के घर उसकी बेटी सुरभि का हाथ मागने गया साहूकार ने साफ साफ मना कर दिया तब धीरे से जैक ने साहूकार से कहा की अभी भी पुलिस को एक मुजरिम जो की लीडर है उसकी तलाश है और मैंने ही बाकी को पकड़वाया है और मै उनके लीडर को भी जनता हु !आप कहे तो बता दू जाकर साहूकार उसका गाँव मे बहुत नाम था बदनामी के डर से वो शादी के लिए हां कर देता है
और इस प्रकार उन दोनों का विवाह हो जाता है ||
कुछ दिनों के बाद जैक नाम का युवा हरी सिँह के पास क़र्ज़ लेने को आया हरी सिंह ने उससे कहा की तुम तो इस गाँव के नहीं लगते तब जैक ने बताया की वो शहर से गाँव मे अपना बिज़नेस करने के लिए रूपए ले कर निकला था लेकिन बिच रास्ते मे ही उससे कुछ डाकुओ ने लूट लिया अब फूटी कौड़ी नी बचा




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